Thursday, 28 June 2012

गजल

गजल-२५

मोहक मद में मातल जेऽ मोनक मीत बनै छी
ठेस कोना नञि लागत आन्हर भऽ प्रीत करै छी

श्रृंगारक पाछा आन्हर नै केलौं प्रेमक मोजर 
श्यामल तन अनुरागे आ विरहे पीत पड़ै छी 

पापी पेट पोसै लै परदेस देलौं पेटकुनिया
भरि जग सँ बौएलौं आब घरक भीत धरै छी

हाइरक डर डेरा कऽ छोड़ि देलौं सच बाजब
फूइसक गाछ छड़पि कऽ दुनिया जीत कनै छी

काँट - कूश सभ नंघलौं आऽब बाट जुनि पलटू
अहाँ संउसे खीरा खा कऽ कियै पेनी तीत करै छी

अनका सोझ उगललौं जेठक रौदी सन बोली
धधकल अपन करेजा पूसक - शीत तपै छी

अनकर मोन कलपतै कल्पऽ दियौ की करबै
अपना नीकक चिंता मनमरजी रीत रचै छी

कर्मक ई बान्ह-बन्हौटा कियै बान्है छियै अनेरे
बस चारि डेग चललौं आ से बीते-बीत नपै छी

"नवल" रमल अपना में कविता - पाठ करै छी
गजल कहै छी कखनो आ कखनो गीत गबै छी

--- वर्ण- १८ ---
(सरल वार्णिक बहर)
►नवलश्री "पंकज"◄
< २८.०६.२०१२ >

बाल गजल

बाल गजल-५

कीन दे मुरही-कचरी-झिल्ली लवनचूस आ बिसकुट माँ 
लोढि बाधसँ धान जे अनलौ तकर कीन दे तिलकुट माँ

धान अगोअं के जे उसरगल तकर कीन दे फीता-बाला 
काकी जे देलखिन बाला से हाथमें होई छइ छुट-छुट माँ

ललका फीता गूहल जुट्टी तेल सँ माथा गमकै गम-गम 
थकरै केश जहन ककबा लऽ ढील केऽ मारै पुट - पुट माँ

देखि भूख सँ लोहछल नेन्ना दुःख-सुख सभटा लोप भेलै
भंसा घर में घाम सँ भीजल काज करै सभ चुट-चुट माँ

होय कहाँ अनका देखबैलै "नवल" इ मायक माया-तृष्णा
भेड़ निन्न तइयो कहि खिस्से दूध पियाबय घुट-घुट माँ

--- वर्ण- २२ ---
(सरल वार्णिक बहर)
►नवलश्री "पंकज"◄
< २४.०६.२०१२ >

Tuesday, 26 June 2012

गजल-

गजल-२४

कने काल लै जे काज लसियैल जाय छै 
ओ अहिना दिने -दिन बसियैल जाय छै 

जकरा बूइध में छलैयै वियैधि धेने 
आब बुइधिए सँ ओहो खियैल जाय छै 

पहिने दूधो - दही के नञि नपना छलै 
आब नापिए क पाइनो पियैल जाय छै 

जों धिया के वियाह मांग अनुचित भेलै
बेटा बेचै लय बोगली सियैल जाय छै

जाबे तौला भरल ताऽ तऽ सुरसुर केलौं
आब जोड़ण लै टोल छिछियैल जाय छै

मूंह देखिये कऽ मुंग्बा बाँटय के चलन
एत भेटै नै किछु सभ दियैल जाय छै

छलै करनी ई कारण आ की कुसमय
किछु निरोगो जे छल बझियैल जाय छै

कतौ आंचे ओतेऽ नञि की इनहोर हेतै
कतौ धधरा ततेऽ जे उधियैल जाय छै

कामना में "नवल" होश सभके मतल
कियै जोशक लहरि भसियैल जाय छै

--- वर्ण- १५ ---
(सरल वर्णिक बहर)
►नवलश्री "पंकज"◄
< २७.०६.२०१२ >

Saturday, 23 June 2012

बाल गजल

बाल गजल-१
 
निश्छल-निर्मल कोमल बचपन
धिया-पुता केर अलगहिं जीवन
 
चलैत रहछि  सभके अंतर्मन
भावक अजबहिं कूटन - पीसन
 
छै देह लेढायल मोन ई कंचन
कमल-फूल सन लागै अनमन 
 
क्षण ठिठियै क्षण कानै अनढन
चट सलाह आ झट द अनबन
 
बस टांट सोहारी बसिया तीमन
उठि भोरहरबा  सभ सँ नीमन
 
इस्कूल सँ बचबा लेल धरछन
नीक लगई छई मरुआ मीरन
 
कितकित पाड़ल सगरो आँगन
चईत-कबड्डी मुँह में सदिखन
 
हो मेघ-सुरुज या चान-तरेगन
जहि पर हाथ धेलक से अप्पन
 
"नवल"कथी फुरि जेतय कक्खन
बाल-मनक नै किछु परिसीमन
 
  --- वर्ण- १३ ---
(सरल वर्णिक बहर)
►नवलश्री "पंकज"◄
< ०४.०४.२०१२ >