Saturday, 23 June 2012

बाल गजल

बाल गजल-१
 
निश्छल-निर्मल कोमल बचपन
धिया-पुता केर अलगहिं जीवन
 
चलैत रहछि  सभके अंतर्मन
भावक अजबहिं कूटन - पीसन
 
छै देह लेढायल मोन ई कंचन
कमल-फूल सन लागै अनमन 
 
क्षण ठिठियै क्षण कानै अनढन
चट सलाह आ झट द अनबन
 
बस टांट सोहारी बसिया तीमन
उठि भोरहरबा  सभ सँ नीमन
 
इस्कूल सँ बचबा लेल धरछन
नीक लगई छई मरुआ मीरन
 
कितकित पाड़ल सगरो आँगन
चईत-कबड्डी मुँह में सदिखन
 
हो मेघ-सुरुज या चान-तरेगन
जहि पर हाथ धेलक से अप्पन
 
"नवल"कथी फुरि जेतय कक्खन
बाल-मनक नै किछु परिसीमन
 
  --- वर्ण- १३ ---
(सरल वर्णिक बहर)
►नवलश्री "पंकज"◄
< ०४.०४.२०१२ >

No comments:

Post a Comment